बेतरतीब मकान को
बडे जतन से संवार कर
उसे घर बनाती है वह
... और ढूंढ रही होती है
कोई ऐसा कोना
जहां घडी-दो घडी
बैठकर खुद से करे
ढेर सारी अनकही बातें
जिसकी दीवारें बन जाएं कैनवस
और वह उन पर चस्पां कर दे
उम्मीदों से भरा एक कोलाज
सदियों से उसकी यह तलाश जारी है
पर वह अब तक
ढूंढ न पाई
कोई एेसा कोना
जहां वह जी ले
कुछ पल अपने साथ
....सिर्फ अपने लिए।
बडे जतन से संवार कर
उसे घर बनाती है वह
... और ढूंढ रही होती है
कोई ऐसा कोना
जहां घडी-दो घडी
बैठकर खुद से करे
ढेर सारी अनकही बातें
जिसकी दीवारें बन जाएं कैनवस
और वह उन पर चस्पां कर दे
उम्मीदों से भरा एक कोलाज
सदियों से उसकी यह तलाश जारी है
पर वह अब तक
ढूंढ न पाई
कोई एेसा कोना
जहां वह जी ले
कुछ पल अपने साथ
....सिर्फ अपने लिए।

बेहतरीन लिखा है मैम!
जवाब देंहटाएंमन को छू गई
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